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“मनोविकारक युग”

ऐसा लग रहा है देश कशी का घाट बना हुआ है कही कोई जन्म की बधाई लेके गंगा स्नान करने आया है तो कही कोई पिता अपने सफल से असफल हुए पुत्र के मृत्यु को अग्नि देने आया है. कही कोई विवाहित / विवाहिता अपने जीवन के नई शुरुआत का आचल भने आया है तो कही कोई अपने साथी के अलग होने के वियोग में कुछ उतारें और छोड़ने आया है सब एक साथ – सुख-दुःख,   जहा अद्भुत है वही वीभत्स भी है जहा उत्साह   है तो वही   है निराशा चरम पे है इतना सब एक साथ घटित हो रहा है की समझ में नहीं आरहा उल्लास मनाये या क्रंदन करे. निश्चय ही कुल मिलाकर बहुत ही “ मनोविकारक युग” चल रहा है. #Hima Das# Unnav #Chandrayan  # Nirav  Modi #Beti Bachao Beti Padao #Jivanu, Jaipur #Startup # failures #entrepreneur #CDD 

ये ज़िन्दगी गले लगा जा ......

हर पल ..हर लम्हे में है जिन्दगी... ऐसा सुना है, ...और देखा भी है .. पर  ये ज़िन्दगी है क्या? क्या सांसो का लेना और जिन्दा रहना जिन्दगी है .. तो फिर आपने क्या नया कर लिया ये तो सबने सुना और देखा ही है ... आप सोचो और खुद से पूछो! " जिन्दगी मात्र सांसो को लेना या जिन्दा रहना नहीं बल्कि जिन्दगी यानि "आप". आपका हँसना  -रोना,   इच्छा - चाहत, सोच - विश्वास, कर्म- अपेक्षा, आपके   मनोभाव, सुख- दुःख का एहसास, सब से मिल कर बनती है जिन्दगी. और ये जिन्दगी मात्र आपकी होती है .. किसी और से न बनती है और न ही बिगड़ सकती है..ये  आपके साथ हर हाल में रहती है , आप किसी भी हालात या हालत में हो आपकी जिन्दगी सदैव आपके साथ रहती है . .और आपका सदैव साथ देती है.. जो चीज उसे दोंगे ठीक वैसा ही दुगना कर  आपको वापस करेगी .. अब आप के उपर है उसका साथ कैसे लेते है...और उसे अपना साथ कैसे देते है.. सकारात्मक .. हसते ..गुनगुनाते ..और विश्वास के साथ या फिर किसी और तरह .. गुनगुनाओ एक बार मुस्करा के ये जिन्दगी गले लगा ले  ...$ $ $ $ $ 

Khol do bandhno ko ...

खोल दो सारे बंधनो को .. मन के घोड़े पे सवार इच्छाओ को मुक्त आकाश में उड़ने  दो .. कभी कभी आसमा को छूकर जमी पे गिरना अच्छा लगता है .. इस गिरने में आसमा और धरती की दूरी एहसास होता है  .. मिलना तो वैसे भी एक दिन मिटटी में है .. क्यों न उड़  कर ही मिले..  न जाने इस उड़ान में बदलो की कुछ बून्द भी समां जाये . और जब मिटटी में मिले तो सोधि खुशबू  आजाये .. जो अक्सर लोग को  बरबस खीच लेती है .. हर लम्हा,  हर वो  ख्वाहिशे जीने के लिए है ,, जो हम अक्सर खुली आँखों से देखते है.. खोलो तो सही .. बंधनो के धागो को .. काटने से .. गिरने से क्यों डरते हो .. जीना इसी धरती पे है .. गिरना भी इसी धरती पे है .. तो फिर क्यों न ख्वाहिशो की उड़ान भर कर .. बदलो के कुछ बून्द चुरा कर, गिरे उसका मजा ही कुछ और है ... टूटना बिखरा भी मन का ही खेल है ..  तो फिर खेल को पूरा खेल कर ही क्यों न जाये ... खोल दो सारे बंधनो को .. मन के घोड़े पे सवार इच्छाओ को मुक्त आकाश में उड़ने  दो ..

कमिटमेंट जीवन के साथ

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अक्सर  सुना है लोग बदल जाते है, वक्त के साथ, मुझे भी यही लगता था की लोग बदल जाते है.. पर जैसे-जैसे जिंदगी को जी रही हू, वैसे वैसे लग रहा है लोग नहीं बल्कि जिंदगी नया रूप देती है, नया नजरिया देती है,  जीने के लिए, लोगो को जानने के लिए! इसलिए लोग बदले नजर आते है! लोग पहले से ही ऐसे ही थे  और है ! बस आपका परिचय अभी हुआ है!   हा इसी से जिंदगी का नयापन हमेशा बना रहता है. हर मोड़ पे एक नया  रूप. नयी पहचान खुद की और लोगो की.   इधर बिच कुछ नए रूप से पहचान हुई, हा ये परिचय मेरे जीवन में  पहला परिचय था.. पर ये बहुत ही खुबसूरत परिचय है. जिंदगी से कमिटमेंट हो रहा है ... इसके बाद सब  बदल गया  क्यों की कमिटमेंट जो बदल गयी थी..  (पहले कमिटमेंट लोगो से थी अब लाइफ से है .. जिंदगी के हर पह्लू से है ...इसे इसके उदेश्य को जानना है और इसको पाना है) एक मजे की बात जब से मुझे जिं...

"चुस्की ले तो मनवा फेंटास्टिक हो जाये "

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सुबह उठते  ही  अपने  पसंद के काच के ग्लास में अदरख वाली चाय मिल जाये ... और उसे भजन के साथ चुस्की ले कर पी जाये , फिर पेड़ो को पानी दे सूरज के साथ आख मिचौली न कर लो तब तक न सासों में ताजगी ना पुरे दिन के लिए जीवन रस. बड़ा नीरस सा लगता है दिन जैसे सुखी काठ जिसमे  कोई रस ही नहीं  और रस नहीं तो स्वाद कैसा ? इधर बीच इसकी  महत्ता का पता चला! पता क्या चला मै कहने-सुनने में वो भी जिंदगी के रस के मामले में ज्यादा  विश्वास  नहीं करती जब तक मै खुद ना अनुभूत कर लू. आप कह सकते हो ये मेरे में बहुत बड़ा लोचा है! पर क्या कर सकते है! कुछ भी नहीं! मै खुद लाचार हू.. क्यों की कई बार सुधरवादी आन्दोलन में मुझे भी मेरे अपनों ने सुधारने की  बड़ी कोशिश की पर असफल हो जाते है..! पर एक  बड़े राज की बात बताती हू इसमें अपना ही मजा है - सोमरस जैसा ! हमेशा ताजा तरीन बने रहने का एहसास... नए स्वाद का एहसास..! आपके रस स्वाद का विस्तार होता है ! जब आप अपन...

तेरी प्रभुताई तो तभी जचती है जब तू भी मुझे अपने दिल में रखता !!!!!

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कल कबीर को सुन रही थी याद आया गुजरा जमाना कि कैसे ये मेरे में उतर गए और मुझमे ही मिल गए ! कबीर तुलसी और सूरदास इन तीनो को बचपन से पढती आरही थी पर इनको १०वी कक्षा से समझना शुरू किया था और ग्रेजुएट होते होते इनमे रमने लगी थी ! कबीर तो मेरे जीवन के मार्ग दर्शक बन गए. कितनी अजीब बात है बिना आडम्बर के महाराज और महिमामंडित गुरु देव की पाखंड से दूर बिना गुरु दक्षिणा  लिये ...लाग-लपट रहित, छल-छ्दम से परे जीवन का रस  दे गये! तुलसीदास जी मुझे थोड़ा कम  ही रमते, पहले भी आज भी ! इसलिए नहीं की उनकी महत्ता कम है! कबीर की दोहावली और सूर के पद इक्के - दुक्के घरो में ही मिलेंगे पर ' राम चरित मानस' तुलसी दास जी की रचना घर घर में मिलेगी ! मेरे पास भी है ! उसके कुछ दोहे गाने मुझे भी पसंद है ! पर यहाँ बात महनता की नहीं है बात यहाँ भाव की है! तुलसीदास जी ने दास भाव से अपनी भक्ति को रखा है और इसलिए मुझे वो भाव जचता ही नहीं और रमने की बात में सूरदास जी बाजी मार गए ! क्यों की सूर की भक्ति भाव सखा है! कैसा छोटे बड़े का भेद ? तुम...

दिल तो बच्चा है जी!!!!!

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दिल को सहारा  चाहिए मन को किनारा!! दिल सहारे में डूब मुस्कराता है मन किनारे के लिए जाल बिछाता है! दिल की दुनिया अपनी होती है मन की तो ठोक-ठाक  के  बसाई जाती है ! दिल जानता भी नहीं क्या अच्छा है क्या बुरा मन हर बार तौलता है क्या और कितना भला !  दिल का तार  धरकन से जुड़ा मन तो  मस्तिस्क के  उलझन में पड़ा  ! दिल में खोये  तो........ आप किसी के और आपका कोई हो गया मन में खोये तो औरो का  क्या.... आप ही अपने ना हुए !  दिल जब भी धड़का तो  दुआए निकली है .. जो अक्सर दूसरो से ही जुड़ी है मन जब भी दौड़ा  तो  तमन्नाये निकलती है ..... जो अक्सर अपने सुख से जुड़ी होती है ! दिल का सब  गवा ...उफ़ ना किया मन का गया तो उसमे घाव बन गया ! हे प्रिये मैंने तुझे दिल से और तुने मुझे मन से जोड़ा इसलिए तू मुझसे दूर हो कर भी है मुझ में ही छुपा  ! और मेरे दिल के तरानों...

न जाने कहा कहा ढूढा और तू मुझ में ही मिला

बड़ा ही आनंदमय एहसास अपने अंदर के सुकू से परिचित होना ! हा मिलता है बड़े पापड़ बेलने के बाद ! पर सारे पापड़ कबूल इस एहसास के लिए ! योग इसलिए नहीं करना पड़ रहा की स्ट्रेस को ख़त्म करना है! संगीत इसलिए नहीं सुनना कि अपने अंदर के उथल पुथल से दूर होना है ! नृत्य  इसलिए नहीं करना कि अपने को पाने कि कोशिश करना !  जिसे वर्षो से ना जाने क्या क्या कर के पाने की कोशिश  कर रही थी और  नहीं कर पा रही थी.....एक झटके में सब बदल गया !!! मन का सुकून   ... सुरक्षा का एहसास !!!! जो खुद में ही मिला था पर मृग की तरह ना जाने कहा-कहा  और किसमे-किसमे ढूढने  का असफल प्रयास करती रही ! कभी माँ-पिता में, कभी साथी में तो कभी प्यार में, तो कभी-कभी जीवकोपार्जन के लिए नौकरी में भी!......पर सब बेकार .....! एक के बाद एक झटको ने मुझे मेरे करीब लता गया और मै नासमझ  उन झटको के लिए कुढ़ी ... दुखी हुई... हजार बार रोई... पर मुझे क्या पता था कि ये कड़ीय थी! जो टूट रही थी मेरे को मेरे से परिचय करने  के लिए... मेरे सु...

आप औरो से बहुत अलग हो !!!

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आप से बात करने में थोरा डर लग रहा था क्यों कि आप औरो जैसी नहीं हो  ! आप बहुत ही इंटेलिजेंट  और स्ट्रिक्ट  दिखाती हो  !! रिप्लाय- कोई बात नहीं आप बात कर सकते है बताये क्या बात है ? देखा आप बहुत ही समझदार और सहज है ! आप ब्रेन विथ ब्यूटी हो जो आज के वक्त बमुश्किल से मिलते है! रिप्लाय - जी आजकल की लड़किया तो ऐसी है जो काम कम और बेकार की मौज परस्ती में ज्यदा है ! उन्हें तो काम से कोई मतलब नहीं बस किसी तरह पैसे बन जाये ! फैशन पर ना जाने कितना टाइम देती है ! रिप्लाय -  जी ठीक है तो मैम आप बताये की मै आपसे कब मिल सकता हू ! रिप्लाय - किस लिए ? आप से मिल कर मुझे बहुत अच्छा लगा ! आपसे मिल कर जो मुझे ख़ुशी  मिली  उसे मै बाया नहीं कर सकता ! आप बस एक मौका दे हम साथ में बैठकर डिनर  नहीं तो लंच तो ले ही सकते है ! आपके ५ मिनट के लिए मै कुछ भी कर सकता हू ! आपसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा ! आप चाहे तो आप के लिए मै आपका शोपिंग  में भी साथ दे सकता हू ! आप को जो पसंद आये वो ले भी लेना ! रिप्लाय -...

आपकी जन्म भूमि की मिटटी को आपसे बहुत प्यार है ! !

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ये अंपने जन्म स्थली में बिताये हुए तीन दिन की उर्जा ही है जो फिर से आयी हुई चुनौतियों में भी मुझे शांति  और सकारात्मक सोच दे रहे है ! मेरी खुशिया इमोशन और प्यार से ना जाने कितनी बढ़  जाती है, कई दिनों तक उसका नशा मुझे जीवंत बनाये रखता है ! अब आप सोच रहे होंगे वो तीन दिन मैंने कहा व्यतीत किये! तो इस वर्ष फुल्ली मस्त दशहरा अपने गाँव में मनाया ! मेले का पैसा भी बटोरा और अपना बटुआ खाली भी किया क्यों की अब मै सिर्फ बेटी ही नहीं बुआ और मौसी   भी हू ! वो सब  जिया जो अब के बच्चो के लिए आश्चर्य  है क्यों की मेरी पीढ़ी और आजकी पीढ़ी में १० वर्ष कि  दूरी है ! और ये १० वर्ष की दूरी मात्र हमारे शहरो में ही हमे अपनों से दूर नहीं कर दिए है, बल्कि गाँव की सामुदायिकता को भी पलट कर रख दिया है! जरूरतों और प्रगतिशीलता की होड़ वहा भी लगी हुई है! इस लिए वो सब आपको मिलेगा जो आप शहर में जीते है! और वो सब नहीं मिलगा जो आप १० वर्ष  पहले पाते थे, जिनके लिए  बच्चो कि छुट्टियों होते ही भाग कर अपने गाँव जाते ...

शुभ दीपोत्सव

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दीप्त हो जीवन पथ.. पूर्ण हो सब मनोरथ....., श्रीकृपा से प्लावित हो.... सुयश धर्म और अर्थ.....! दीपमालिका के सुअवसर पर आपके उज्जवल पथ पर एक नव दीप हमारी शुभकामनाओ का!!!

Happy Birthday Song

तो मिलोगे ही !!!!

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बादल है तो सावन आएगी ही ! पतझड़  है तो बहार आएगी ही !! सागर है तो नदिया मिलेंगी ही ! बन है तो मोर नाचेंगे ही !! फूल है तो भवरे गूंजेगे  ही ! दीप जली तो पतंगे गिरेंगे ही !! माँ है तो ममता मिलेगी ही ! जीवन है तो भावनाए उमड़ेगी ही !! मन है तो विचार आएगा ही ! प्यार तुम हो तो मिलोगे ही !!!!

ग्राम पंचायत- मुर्गा-दारू पार्टी -यही तो है स्वराज!!!!!!!

आज सुबह-सुबह मेरी माँ का फोन आया कि वो नहीं लड़ेंगी ग्राम-प्रधान  का  चुनाव !! मुझे अच्छा नहीं लगा मेरी माँ का इस तरह लड़ाई  के पहले ही अपने  सपनो को ख़त्म करना ! मेरे पिता जी सरकारी नौकरी से  सेवानिवृत हो कर गाँव में रहना पसंद किये और वहा के लिए दोनों ने यथासंभव कार्य करना पसंद किये! पर मेरी सोच  "रंग दे बसंती" से प्रभवित है! अगर अच्छा चाहते हो तो पॉवर में आवों! चाहे वो ब्यवस्था की पहली कड़ी ही क्यों ना हो ! क्यों की सोच सभी रखते है और अपनी सोच को ट्रेन में, बस में,  चौपाल में,  अपने खाली समय में, दूसरो के सामने अच्छा बनने में अक्सर जाहिर करते रहते है! इससे कुछ नहीं होने वाला ! पर क्या करे मेरी माँ सारा जीवन दूसरो के लिए जीकर भी ग्राम प्रधान के लिए नहीं लड़ना चाहती!  वो गाँव   में फैले बीमारी -  मुर्गे और दारू की पार्टी में शामिल नहीं होना चाहती ! सुबह शाम के बीड़ी पार्टी उसे पसंद नहीं! कितना भी प्रचार कर लो विकास का! जागरूक ...

Emotion per Atyachar: प्यार के लिए !!!!!!

प्यार के लिए !!!!!!

प्यार के लिए !!!!!!

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प्यार अगर मोती है तो, मै सीप बनना चाहूंगी ! प्यार अगर एहसास है तो, मै आभास करना चाहूंगी! प्यार अगर धड़कन है तो, मै हिय बनना चाहूंगी! प्यार अगर ज्योति है तो, मै दीप बनना चाहूंगी! प्यार अगर खुश्बू है तो, मै फूल बनना चाहूंगी! प्यार अगर समंदर है तो, मै गहराई छूना चाहूंगी! प्यार अगर अम्बर है तो, मै क्षितिज बनना चाहूंगी ! प्यार अगर खूबसूरती है तो, मै आँखों में बसाना चाहूंगी! प्यार के लिए !!!!!! प्यार अगर कल्पना है तो, मै उसे सपनो  में सजोना  चाहूंगी! प्यार अगर कर्म है तो, मै लगन से करना चाहूंगी! प्यार अगर  हे ईश्वर तुम हो ! तो तुह्मे अपना बनाना चाहूंगी!!!!!! बस एक प्यार ही तो है जहा में   जिसके लिए ये जीवन  जीना चाहूंगी !

मुझे तो एक तारा बनाना है !!!!!!!

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मुझसे किसी ने सवाल किया, तुम खूबसूरत चाँद बनाना चाहोगी ? जबाब  दिल ने दिया - वो खूबसूरत चाँद ! जो अपने चौदह कलाओ से पूर्ण, सितारों में सबसे तेज चमकता है !! जिसे लाखो प्रेमी रात में देख आहे भरते है, और अपनी खूबसूरत प्रेमिका की याद में तड़पते है!! कवियो  ने जिसे अपनी कविता का शीर्षक बनाया, उसने भी तो  चांदनी बिखेर रात को खूबसूरत सजाया!! जिसे देख चकोर को चकोरी की याद आयी, और ब्याकुल कर गयी उसे अपनी तन्हाई!! फिर भी मै चाँद  ना बनाना चाहूंगी, किसी पृथ्वी के भ्रमण में जीवन ना गवाना  चाहूंगी. मुझे तो एक तारा बनाना है जो स्व प्रकाशित हो शांत रहता है. अपने में मग्न कुछ जंहा से खोया रहता है !!

सावन की महक

बदली आई रिमझिम के संग , मेघ गरजे बिजली के संग , आम की डारी झूमे बौरो के संग , गेहू की बाली झूमे हरियाली के संग , बरखा आयी है प्रियतम के संग, प्रिय गए थे परदेश चुनरी आयी है उनके संग../

सपने अभी काफी है............./

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आज कुछ ऐसा हुआ, जैसे किसी ने मेरे अंतर्मन  को छुआ, आई एक ठंडी बयार, मन को दे गयी खुमार. कल्पना की ऊँची  उड़ान, छूने लगी क्षितिज आसमान. मन को लगा मंजिल यही है, जिंदगी  की खुशिया  यही से जुडी है. सारे सपने उसी के आने लगे, अंतर्मन  के तरंगो पर छाने लगे. हवाओ  में  उसी की खुशबू है, खिली-खिली धूप पर भी उसी का जादू है. ऊफ ये कैसी तूफान, जिसमे सब  ख़त्म करने की उफान. नहीं ये तो  एक मंजर है,  जो देता अपना होने का वहम है. कहा यहाँ अपना है कोई, जिसकी तलाश में पूरी रात ना सोई. सफ़र तो अभी बाकी है, सपने  अभी काफी है............./

मिडिया वाले उसमे रोमांच भरे या ना भरे!!! सईना नेहवाल की जीत भारत की जीत है!!!

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सईना नेहवाल ने जो जीत का इतिहास रचा उस पर मिडिया वालो को शायद खबर बनाना नहीं आ रहा. वो शायद इसलिए क्यों कि सईना में प्रतिभा ही प्रतिभा  है, ग्लैमर  तो है नहीं! और मिडिया या तो ग्लैमर  की भूखी है या फिर चटकारो  के लिए बैठी है. उनके लिए  क्रिकेट टी. आर . पी. के लिए धंधा है इसलिए एक मैच  में हार जाये तो और जीत जाये तो सारे चैनल उनके सर पर ताज पहनाने के लिए या उतारने के लिए बड़े जोश के साथ बैठे रहते है. वो भी सारे सारे दिन और कई दिन !!!!!!! हम देखना चाहे या ना चाहे पर मिडिया बेचारी क्या करे अब सब  बात टी. आर . पी. के दौड़ का है . सानिया मिर्जा अगर एक मैच जीत जाती है तो वाह-वही ही वाहवाही, उनकी खबरों में सुर्खिया ही सुर्खिया होती है , हार गयी तो खबर आयी गयी हो जाती है! सईना नेहवाल के पास सच्ची और लगन से भरपूर प्रतिभा है पर ग्लैमर  नहीं है इसलिए मिडिया को ये  सुर्खिया बटोरने  या फिर खबरों को जोरदार बनाने जैसा चमकदार नहीं लगता.  इसलिए वहा भी  सईना के जीत के जश्न से ज...