दिल को सहारा चाहिए मन को किनारा!! दिल सहारे में डूब मुस्कराता है मन किनारे के लिए जाल बिछाता है! दिल की दुनिया अपनी होती है मन की तो ठोक-ठाक के बसाई जाती है ! दिल जानता भी नहीं क्या अच्छा है क्या बुरा मन हर बार तौलता है क्या और कितना भला ! दिल का तार धरकन से जुड़ा मन तो मस्तिस्क के उलझन में पड़ा ! दिल में खोये तो........ आप किसी के और आपका कोई हो गया मन में खोये तो औरो का क्या.... आप ही अपने ना हुए ! दिल जब भी धड़का तो दुआए निकली है .. जो अक्सर दूसरो से ही जुड़ी है मन जब भी दौड़ा तो तमन्नाये निकलती है ..... जो अक्सर अपने सुख से जुड़ी होती है ! दिल का सब गवा ...उफ़ ना किया मन का गया तो उसमे घाव बन गया ! हे प्रिये मैंने तुझे दिल से और तुने मुझे मन से जोड़ा इसलिए तू मुझसे दूर हो कर भी है मुझ में ही छुपा ! और मेरे दिल के तरानों...
सुबह उठते ही अपने पसंद के काच के ग्लास में अदरख वाली चाय मिल जाये ... और उसे भजन के साथ चुस्की ले कर पी जाये , फिर पेड़ो को पानी दे सूरज के साथ आख मिचौली न कर लो तब तक न सासों में ताजगी ना पुरे दिन के लिए जीवन रस. बड़ा नीरस सा लगता है दिन जैसे सुखी काठ जिसमे कोई रस ही नहीं और रस नहीं तो स्वाद कैसा ? इधर बीच इसकी महत्ता का पता चला! पता क्या चला मै कहने-सुनने में वो भी जिंदगी के रस के मामले में ज्यादा विश्वास नहीं करती जब तक मै खुद ना अनुभूत कर लू. आप कह सकते हो ये मेरे में बहुत बड़ा लोचा है! पर क्या कर सकते है! कुछ भी नहीं! मै खुद लाचार हू.. क्यों की कई बार सुधरवादी आन्दोलन में मुझे भी मेरे अपनों ने सुधारने की बड़ी कोशिश की पर असफल हो जाते है..! पर एक बड़े राज की बात बताती हू इसमें अपना ही मजा है - सोमरस जैसा ! हमेशा ताजा तरीन बने रहने का एहसास... नए स्वाद का एहसास..! आपके रस स्वाद का विस्तार होता है ! जब आप अपन...
ऐसा लग रहा है देश कशी का घाट बना हुआ है कही कोई जन्म की बधाई लेके गंगा स्नान करने आया है तो कही कोई पिता अपने सफल से असफल हुए पुत्र के मृत्यु को अग्नि देने आया है. कही कोई विवाहित / विवाहिता अपने जीवन के नई शुरुआत का आचल भने आया है तो कही कोई अपने साथी के अलग होने के वियोग में कुछ उतारें और छोड़ने आया है सब एक साथ – सुख-दुःख, जहा अद्भुत है वही वीभत्स भी है जहा उत्साह है तो वही है निराशा चरम पे है इतना सब एक साथ घटित हो रहा है की समझ में नहीं आरहा उल्लास मनाये या क्रंदन करे. निश्चय ही कुल मिलाकर बहुत ही “ मनोविकारक युग” चल रहा है. #Hima Das# Unnav #Chandrayan # Nirav Modi #Beti Bachao Beti Padao #Jivanu, Jaipur #Startup # failures #entrepreneur #CDD
वाह क्या बात है इतने अच्छे विचार और शब्द कहा से लाती है | आप को भी दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाये |
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